कहानी की कहानी
“उनींदे के दरवाजे़ सपने के सुरंग में उतरते ही मुसाफिर को ख़याल हुआ वह ग़लत ठिकाने चला आया है, उसने खूब हाथ-पैर पटकने शुरु किये, मगर कहानी में एक मर्तबा कूद पड़ने के बाद अब क्या हो सकता था, भोला मुसाफिर लचीले तारों की महीन, नशीली दुश्वारियों में और-और...
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Pramod Singh
साहित्यिक झोला
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[18 May 2010 04:54 AM]



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