दर्द जो आखिर बह निकला!
आज सुबह जब ऑफिस आई तो एक मेल थी मेरे एकाउंट में और उसमें थी एक कविता - पढ़ा सोचा और आँखें भर आयीं फिर डूबने लगी अतीत में और उतराने लगी वर्तमान में...
[पूरी पोस्ट]
रेखा श्रीवास्तव
मेरी बेटी और जीवन एक चुनौती
47
4
0
4
15
[18 May 2010 04:28 AM]



Shuffle








