कमी अपनों की खलती ही है!-(कविता)

kunwarji's रातो में,बातो में,कभी खयालो मेंकभी हालातो में,कभी जोश में कभी जज्बातों में,किसी से बिछुड़ने पर किसी की मुलाकातों में,मौत के हमले में,कभी जिंदगी की घातों में,बोझ होते रिश्तों मेंकहीं नए जुड़ते नातों में...कमी अपनों की खलती ही है! जय हिन्द जय... [पूरी पोस्ट]
writer kunwarji's

(कविता)

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[18 May 2010 04:35 AM]

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