माना तुम्हें शहर ने जगमग जगमग रातें दी होंगी

हिन्द-युग्म भरा-भरा सा दिन लगता है लेकिन खाली-खाली शामकहाँ गयी चौपालों वाली बतियाती मतवाली शाम घर जाने का मन होता था मन में घर आ जाता था शाम ढले ही इंतजार में खुलती खिड़की वाली शाम सारे दिन की थकन मिटाती गय्या जैसी लगती थी आँगन के पीपल के नीचे करती हुई जुगाली शाम... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

ravindra sharma ravi

views
13
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
12
[18 May 2010 04:19 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix