सत्ता की नीति कहती शर्म छोड़ मुँह मोड़ो...

शिवकुमार मिश्र  और ज्ञानदत्त पाण्डेय  का ब्लॉग बहुत दिनों बाद तुकबंदी इकठ्ठा करने बैठा तो करीब पचास ग्राम मिलावटी तुकबंदी इकठ्ठा हो गई. मिलावटी इसलिए कि हिंदी में अंग्रेजी के शब्द मढ़ दिए गए हैं. अब इसके लिए कोई हिंदी-द्रोही कह कर चैन से न बैठे तो कोई बात नहीं. मैं हिंदी की आधी सेवा करता... [पूरी पोस्ट]
writer Shiv
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[18 May 2010 01:52 AM]

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