दुश्मने-जां से भी मिलिए मुस्कुरा करके...

अभिव्यक्ति दुश्मने-जां से भी मिलिए मुस्कुरा करकेदेखिये सारे शिकवे-गिले को भुला करकेदुश्मने-जां से भी मिलिए मुस्कुरा करकेवफा के बदले अब नहीं मिलती वफा हमने तो देखा है ये भी तजुर्बा करकेखुशिया भी मिली तो अजनबी बनके जब से गया वो गम से आशना करके ख्यालो कि मंजिल कदम-२... [पूरी पोस्ट]
writer gargi gupta

रोहित कुमार "मीत"

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[18 May 2010 00:47 AM]

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