ग़ज़ल: इश्क़-ऐ-हकीकी
इश्क़-ऐ-हकीकीहै चाहत इश्क़, यह प्यारा है इश्क़सबब जीने का हमारा है इश्क़दिलों में बसता है ढ़ूंढने से क्या हासिलइस गोल सी दुनिया का किनारा है इश्क़डूबते हो तिनका भी नज़र आए साहिलअंधेरी रात में जलता हुआ तारा है इश्क़दिल तो खोया हुआ है कब से इसके पहलू मेंहमने इस...
[पूरी पोस्ट]
Shah Nawaz
Hindi poem
11
0
0
0
0
[17 May 2010 23:40 PM]



Shuffle







