मीठी-मीठी भू जहाँ

भारतीय वास्तु शास्त्र मीठी-मीठी भू जहाँ , गंध सुहानी देय।सब सुख सुलभ होय वहाँ, कृपा-सिंधु सब देय।।कृपा-सिंधु सब देय, तो बढ़े वंश धन-धान।सभी देय सम्मान, कोर्ट-कचहरी में मान।।कह `वाणी´ कविराज, दु:ख-दर्द सब के भागे।जाय खरीदो प्लाट, भू जहाँ मीठी लागे।। शब्दार्थ : मीठी लागे =... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com
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[17 May 2010 23:20 PM]

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