“न्याय करेगा कौन?” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
वानर बैठा है कुर्सी पर, हुई बिल्लियाँ मौन! अन्धा है कानून हमारा, न्याय करेगा कौन? लुटी लाज है मिटी शर्म है, अनाचार में लिप्त कर्म है, बन्दीघर में बन्द धर्म है, रिश्वत का बाजार गर्म है, हुई योग्यता गौण! अन्धा है कानून हमारा, न्याय...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[17 May 2010 23:05 PM]



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