बारूद की गंध से, नक्सली आतंक से पेड़ों की आपस में बातचीत बंद है
कल बस्तर में हुए बारूदी विष्फोट में क्षत-विक्षत 50 मानव लाशो से टीवी के द्वारा आपका भी सामना हुआ होगा। दिन प्रतिदिन घट रही ऐसी दर्दनाक घटनाओं, करूणा और आक्रोश के स्थानीय हालातों में हिन्दी ब्लाग जगत में भी रहने का मन नहीं लग रहा है, कुछ दिनों...
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संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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[17 May 2010 23:03 PM]



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