त्रिपदम (हाइकु)
डरा कपोतबिल्ली टोह में बैठीबचेगा कैसे पंछी आज़ादआँख कान थे बंदध्यान मग्न था मैं-मैं या म्याऊँकरते प्राणी सबशेष हैं मूर्खसोचा मैंने भीखामोश हूँ क्योंबैठी जड़ सीक्या ऐसी हूँ मैंतटस्थ या नादानभावुक जीव सभी निरालेगुण औगुण संगस्वीकारा मैंने...
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मीनाक्षी
हाइकु (त्रिपदम)
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[17 May 2010 16:24 PM]



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