शहर के दुकानदारों, कारोबार-ए-उलफ़त में
जावेद अख्तर जी का लिखा हुआ और नुसरत जी द्वारा गया गया यह गीत मेरे सबसे पसंदीदा गीतों में से एक है..शहर के दुकानदारों कारोबार-ए-उलफ़त मेंसूद क्या ज़ियाँ* क्या है, तुम न जान पाओगेदिल के दाम कितने हैं ख़्वाब कितने मँहगे हैंऔर नकद-ए-जान** क्या है तुम न जान...
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[17 May 2010 16:00 PM]



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