मेरा उत्तर [मेरे मित्र विनय कुमार की कविता]

Kavya Therapy अपेक्षाएँ हैं मुझसे कितनी,पूरी कर न सकूँ जितनी. लाभ इसका होगा क्या, मेरी बस बात है इतनी. लिखूँ गद्य लिखूँ पद्य, न सेवन करूँ कभी मद्य. विचारूँ छंद उतारूँ निबंध, बुरी हर बात पे प्रतिबन्ध. 'उनका' विचार अब त्याग दूँ, सीमाएँ अपनी बाँध लूँ. दिखाया है आपने... [पूरी पोस्ट]
writer PRATUL
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[17 May 2010 14:52 PM]

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