दूसरे की सोच पर चलकर-हिन्दी शायरी
हम खुली आंखों से सपने देखते रहें, हम अमन से जियें, जंग के दर्द दूसरे सहें, कोई करे वादा तो शिखर पर बिठा देते हैं वोट देकर। हम खूब कमाकर परिवार संभालें, दूसरे अपना घर उजाड़ कर, ज़माने को पालें, कोई दे पक्की गांरटी तो पीछा छुड़ाते हैं नोट देकर, शायद नहीं...
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दीपक भारतदीप
हिन्दीअभिव्यक्तिअनुभूतिसन्देश
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[17 May 2010 13:30 PM]



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