और कितनों को मारोगे, मारना ही समस्या का हल होता तो समस्याएं हल न हो जाती
आज सबसे सस्ती चीज कोई हो गयी है तो वह आदमी की जान है। खासकर उन लोगोंके लिए जो माओवाद के नाम पर एक ही काम करना जानते हैं, जान से मारना।किसी को फांसी पर लटकाकर मारते हैं तो किसी को पत्थरों से तो किसी कोगोलियों से। यह 21 वीं सदी का सच है। कोई प्राचीन...
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विष्णु सिन्हा
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[17 May 2010 11:03 AM]



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