10 रुपये का नोट ....(एक लघुकथा)

दिल की कलम से... आज बहुत दिन बाद एक कहानी लिखी..धन्यवाद दूंगा दीपक 'मशाल' जी को, जिन्होंने प्रेरित किया...आपके लिए प्रस्तुत है एक लघुकथा...दौड़ती भागती ज़िंदगी का कुछ पलों का ठहराव सा, ये लोकल ट्रेन का प्लॅटफॉर्म…यहाँ कदम रुकते हैं पर मन उसी रफ़्तार से चलता जाता... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[17 May 2010 10:27 AM]

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