ज़माना गुज़रा है अपना ख़याल आए हुए

बाजे वाली गली मैं अपनी हज़ार चीज़ों से ख़फा हूं - अपनी सूरत से. अपनी आदतों से. अपने अलालपन से. अपने सपनों से.लोग कहते हैं इंसान के भेजे में भेजा होता है। मुझे लगता है मेरे भेजे में सिर्फ कबाड़खाना है. किसी भगोड़े फिल्मकार का कबाड़खाना. एक ऐसा फिल्मकार जिसने ज़िन्दगी के न... [पूरी पोस्ट]
writer raajkumar keswani
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[17 May 2010 09:14 AM]

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