उन्माद सुख ....
अपने जन्मजात संस्कार और अभिरुचियों के अतिरिक्त अपने परिवेश में जीवन भर व्यक्ति जो देखता सुनता और समझता है उसीके अनुरूप किसी भी चीज के प्रति उसकी रूचि- अरुचि विकसित होती है..बचपन से ही नशेड़ियों को जिन अवस्थाओं में और व्यवहार के साथ मैंने देखा , इसके...
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रंजना
चिंतन
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[17 May 2010 08:10 AM]



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