भगदड़ में जाये भले मुसाफिरों की जान
भगदड़ में जाये भले मुसाफिरों की जानममता जी देतीं नहीं फिर भी कोई ध्यानफिर भी कोई ध्यान न कतई नेह जतातीं'पैसेंजर-की-ही-गलती' वे स्वयं बतातींदिव्यदृष्टि हर हाल उन्हें 'तृणमूल' सुहायेमुसाफिरों की जान भले भगदड़ में जाये...
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दिव्यदृष्टि
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[17 May 2010 07:48 AM]



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