हँस रहे हैं कसाब, रो रहे उज्ज्वल, आ लिखें ऐसे परिवेश में हम ग़ज़ल
न तो जीना सरल है न मरना सरलआ लिखें ऐसे परिवेश में हम ग़ज़लकल नयी दिल्ली स्टेशन पे दो जन मरे रेलवे ने बताया कि ज़बरन मरेअब मरे दो या चाहे दो दर्जन मरेममतामाई की आँखों में आये न जलआ लिखें ऐसे परिवेश में हम ग़ज़लतप रहा है गगन, तप रही है धराहर कोई कह रहा मैं...
[पूरी पोस्ट]
AlbelaKhatri.com
17
3
0
3
11
[17 May 2010 07:55 AM]



Shuffle








