राजा नृग की कथा - उत्तरकाण्ड (9)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण एक दिन लक्ष्मण ने श्रीराम से कहा, "महाराज! आप राजकाज में इतने व्यस्त रहते हैं कि अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं रखते।"यह सुनकर रामचन्द्रजी बोले, "लक्ष्मण! राजा का कर्तव्य होता है राजकाज में पूर्णतया लीन रहना। तनिक सी असावधानी हो जाने पर उसे राजा नृग की... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया

राम

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[17 May 2010 07:37 AM]

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