हे गुमनाम, अज्ञात, अनामी तुम्हारा भी आभार

अन्तर सोहिल = Inner Beautiful हे नामरहित प्राणी तुम कब तक अज्ञात रह पाओगे। कभी ना कभी तो पहचान लिये ही जाओगे। मेरे बडे मुझे बताते हैं कि अनाम, गुमनाम वाली टिप्पणियां बंद कर दो। उनका कहा सिर-माथे। लेकिन मेरे विचार से और तुम्हें भी तो मालूम है कि इससे होगा क्या? तुमतो फर्जी आईडी बनाकर... [पूरी पोस्ट]
writer अन्तर सोहिल
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[17 May 2010 05:44 AM]

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