चालू
लघुकथाचालूउन्होंने जाल फेंका।शिकार किसी तरह बच निकला।यूं समझिए कि ख़ाकसार किसी तरह बच निकला।भन्ना गए। सर पर दोहत्थड़ मारकर बोले, ‘‘तुम तो कहते थे भोला है। देखो तो सही साला कितना चालू आदमी है।’’ -संजय ग्रोवर...
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संजय ग्रोवर Sanjay Grover
लघुकथा
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[17 May 2010 04:37 AM]



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