फिर शब्दों के सिर कटते हैं
कभी कभी सोचता हूँ की लिखना कितना आसान होता है, गरीबी पर, अनपढ़ गरीब बच्चो पर, भूखे बच्चों पर, प्रताड़ित औरत पर, प्रेम पर, संवेदना पर, जुदाई पर, रिश्तों पर, ईमानदारी पर, आत्मसम्मान पर, ,माँ पर, आज़ादी पर या और भी बहुत कुछ है जिस पर हम बहुत...
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nilesh mathur
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[17 May 2010 03:54 AM]



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