कौन चला बनवास रे जोगी-चौथी क़िस्त
नवनीत जी की इस अरदास-सांझ ढले सब घर को लौटेंअपनी ये अरदास रे जोगीके साथ और राजेन्द्र स्वर्णकार के इस अनूठे और सुंदर शे’र-प्रणय विनोद नहीं रे !तप हैऔर सिद्धि संत्रास रे जोगीके साथ हाज़िर है ये चौथी कि़स्त- नवनीत शर्माखुशियों को बनवास रे जोगीपीड़ा का मधुमास...
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सतपाल ख़याल
कौन चला बनवास रे जोगी
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[17 May 2010 02:56 AM]



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