ज़िंदगी है, जंग, लढना सीख लो

सुराही ज़िंदगी है जंग, लढना सीख लोजी सकोगे गर्चे मरना सीख लोना रुका है, ना रुकेगा कारवाँसाथ दो या धूल बनना सीख लोबेटियों जैसी चली वह जाएँगीहँसके साँसोंसे बिछडना सीख लोलोग मिलकर फिर जुदा हो जाएँगेप्यार तनहाई से करना सीख लोमंज़िलें तो उम्रभर झुलवाएगीराह तुम अपनी... [पूरी पोस्ट]
writer मिलिंद / Milind

ग़ज़ल

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[17 May 2010 02:38 AM]

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