आज तुम लटके मिले हो फाँसी पर
युवा कवि दीपक मशाल अपनी लेखनी को लगातार परिपक्व करते जा रहे हैं। सितम्बर 2009 का यूनिकवि सम्मान प्राप्त कर चुके दीपक की एक कविता ने अप्रैल 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता में चौथा स्थान बनाया है।पुरस्कृत कविताः बीजऔर आज तुम लटके मिले हो फाँसी परमगर फिर भी...
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[17 May 2010 01:50 AM]



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