वे अकेली जलाती हैं चूल्हे काली पडती हैं और मां हो जाती हैं - गौरव सोलंकी
कल रविवार की शाम गांधी शांति प्रतिष्ठान में जसम की ओर से कराए गए कविता पाठ में गौरव सोलंकी ने कुछ कविताएं पढीं थी जिनमें एक यह है...छूटी हुई लिपस्टिक वे तुम्हारी पागल रातों में तलाशती हैं अपनी छूटी हुई लिपस्टिक और यकीन करती हैं तबाह होती हैंवे चली जाना...
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[17 May 2010 01:54 AM]



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