ये शब्द मेरे साथ आजकल कबड्डी खेल रहे है!-(कुंवर जी),(कविता)
ये शब्द मेरे साथ आजकल कबड्डी खेल रहे है!मै सोचता हूँ इस बार तो धर-दबोचुन्गा,तैयार भी हो जाता हूँ पूरी तरह!पर पता ही नहीं चलता कब-कैसे वो बोनस भी ले जाते है!और मै खड़ा देखता रह जाता हूँ!अब मै कसता हूँ लंगोटएक बार फिर,हाथो को लगाता हूँमिट्टी भरपूर,मुट्ठियाँ...
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kunwarji's
Hindi poem
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[17 May 2010 01:01 AM]



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