पीर परायी अनुभव कर ले ..इतनी तेरी बिसात कहाँ ?

नारी रचना !  अद्भुत रचना ! अरी ओ निर्लज्ज,निष्ठुर और निर्योग्य रेल मन्त्री !तू और तेरे अधीनस्थ तमाम तन्त्रीदुखी होने के बजाय पीड़ितों का दिल दुखा रहे हैंअपनी दुर्व्यवस्थाओं को जनता की भूल बता रहे हैंहद हैहद हैहद हैममता बनर्जी, तेरी बेशर्मी हद पर हैगज़ब ये है कि तू अभी तक पद पर... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[16 May 2010 23:28 PM]

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