चूनी की रूटी

ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल बारह बिस्वा में अरहर बुवाई थी। कुल बारह किलो मिली। अधिया पर बोने वाले को नफा नहीं हुआ। केवल रँहठा (अरहर का सूखा तना) भर मिला होगा। बारह किलो अरहर का अनुष्ठान चलने वाला है – कहुलने (तसला में गर्म करने) और फिर उसे चकरी में दलने का। घर के कोने अंतरे में रखी... [पूरी पोस्ट]
writer ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey

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[16 May 2010 21:34 PM]

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