ॐ और अल्लाह ....आस्था और अनुभव के सिंहासन पर आरूढ़
ॐ और अल्लाह ....आस्था और अनुभव के सिंहासन पर आरूढ़ हैं. जहाँ मैं है वहां वे नहीं जहाँ मैं नहीं वहां वे हैं. अष्टावक्र : जब तक मैं हूँ, तब तक सत्य नहीं ,जहाँ मैं न रहा , वहीँ सत्य उतर आता है.ग़ालिब ने भी ऐसा ही कहा है: न था कुछ तो खुदा था , कुछ न होता तो...
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L.R.Gandhi
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[16 May 2010 13:29 PM]



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