जिंदगी का सच-शोभना 'शुभि'

Shobhna अगर किसी को याद आये तो दो पल सोच लेनावरना इस मुसाफिर को ये सफ़र तो अकेले ही तय करना हैआते हैं यहाँ तब माँ का आँचल तो होता हैखुशियों को समेटे न जाने कितने लोगों की गोद का सहारा होता हैज़िन्दगी की राहों में कुछलोग साथ निभाते चलते हैकुछ खून के रिश्ते होते... [पूरी पोस्ट]
writer Shobhna Choudhary
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[16 May 2010 14:36 PM]

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