इस बार नज़र नहीं लगने दूंगी !
कितनी छोटी सी लड़ाई थी पर हमारे चेहरे गुब्बारे हो गए थे- महीनों के लिए !जिद उस उम्र कीइगो का प्रश्न थाहार कौन माने !पर उम्र का ही तकाजा था या फिर ख़्वाबों का ...हम हारे तो साथ साथ !जाने कब इस हार की रुनझुन नेकानों में धीरे से कहा - 'इसे प्यार कहते...
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रश्मि प्रभा...
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[16 May 2010 13:44 PM]



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