एक अकर्मण्य दिवस का उजाला झरता जाता है धीरे - धीरे

कबाड़खाना वेरा पावलोवा छोटे कलेवर की बड़ी कविताओं के लिए जानी जाती हैं। उनके पन्द्रह कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। संसार की बहुत सी भाषाओं में उनके कविता कर्म का अनुवाद हो चुका है जिनमें से स्टेवेन सेम्योर द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद 'इफ़ देयर इज समथिंग टु... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer
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[16 May 2010 13:57 PM]

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