एक चिट्ठी मां के नाम ....जिसे अब वो कभी भी न पढ पाएगी
मां पता नहीं आज क्यों मन इतना व्याकुल है , मुझे नहीं पता । आज न तो कोई त्यौहार है न ही कोई दुख या संकट की घडी मुझ पर अचानक आई है , क्योंकि अक्सर इन्हीं दोनों समय पर तुम मुझे बहुत ही याद आती थी , मगर फ़िर भी मैं नहीं जानता कि आज तेरी इतनी याद क्यों आ रही...
[पूरी पोस्ट]
अजय कुमार झा
मां
54
5
0
5
23
[16 May 2010 13:33 PM]



Shuffle








