कहूं शाम इसको कहूं या सवेरा

Jogeshwar Garg कहूं शाम इसको कहूं या सवेरा कभी है उजाला कभी फिर अन्धेरा कभी है खुशी तो कभी गम घनेरा अरे क्या हुआ क्या हुआ हाल मेरा मुझे पूछते सब बता ए मुसाफिर किधर है ठिकाना कहाँ है बसेरा मुझे मार कर कह दिया है शहादत मेरी राख को फिर... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

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[16 May 2010 13:14 PM]

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