ढाल [चित्र काव्य]

दर्शन-प्राशन पहले से ही दिखी भवन में आती अमा अरे! चुपचाप.होली खेल रहा था छिपकर तेल जला तम से दिव-ताप. नत थे दोनों नयन नुकीले बतलाओ थे कौन कलाप. रज्जू बिना छूटे आहत कर काजलमय हृत, करे विलाप ला वह चाप कौन-सी है, यदि कलाकार बनते हो आप. [यह कविता 'ढाल' नामक... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
views
14
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
0
[16 May 2010 12:40 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix