(ग़ज़ल)-बंधन
शेयरतू बांधने चला मुझे मैं बंध न पाऊंगा है प्रीत की ये रीत मैं कैसे निभाऊंगाबादलों से जो गिरी वो पहली बूँद मैं गिरके खो जाऊं कहां कैसे बताऊंगासूर्य की पहली किरण भोर का परिचयजग को रोशनी की सौगात दे जाऊंगाजो उठी तेरे हृदय वो पहली पीर मैंतुम भूलना...
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माणिक
ashok jamnani
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[16 May 2010 11:10 AM]



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