ख्वाब को पकड़ना चाहता हूँ...........
तेरा मेरा यूँ मिलनाजैसे आकाश का धरती को तकनापूजन , अर्चन,वंदन बन आई हो मेरे जीवन में जब से दीदार किया तेरीरिमझिम सी इठलाती ,मुस्काती चितवन का होशोहवास सब गुम हो गएतुम्हारे ही ख्यालों मेंना जाने कहाँ खो गएये कैसी मदहोशी छाई...
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वन्दना
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[16 May 2010 10:52 AM]



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