"विवाह से पूर्व प्रेम, केवल वासनात्मक ही होता है”
आज वैज्ञानिक जो भी शोध कर रहे हैं और उसके निष्कर्षों पर पहुँच रहे हैं, ‘वह सब हमारे पौराणिक शास्त्रों में पहले से ही वर्णित है’। पर;'क्योंकि आज आसुरी प्रव्रत्ति की प्रबलता के वशिभूत हुए'; ‘हम; या हमारे निति-नियंता और तथाकथित बुद्धिजीवी’, “उन विचारों को”,...
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शंकर फुलारा
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[16 May 2010 10:26 AM]



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