निरुपमाओं के लिए निर्मम खाप फरमानों के इस दौर में
यह बेहद क्रूर और कठिन दौर है कोमल-तरल सम्बंधों के लिए। खूबसूरती के खिलाफ बदसूरत और सुगंध के खिलाफ दुर्गन्ध भरा दौर। निरूपमाओं के लिए निर्मम खाप फरमानों के इस दौर में पढि.ए नीलेश रघुवंशी की एक बेहद मार्मिक कविता। हिन्दी कविता की दुनिया में नीलेश रघुवंशी...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[16 May 2010 10:07 AM]



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