मैं कलम कुछ क्रांति की बात लिखना चाहती हूँ...
प्रेम मे डूबे हुए मैं गीत अब न लिख सकूँगी...मैं मिलन की चाशनी मे शब्द लिपटे न चखूँगी...हो भले चिर यौवना सौंदर्य की प्रतिमा भले हो...मैं समेटे कोख मे शृंगारिता अब न रखूँगी...मैं नहीं स्याही तुम्हारा रक्त बिंदु मांगती हूँ...मैं कलम कुछ क्रांति की बात लिखना...
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दिलीप
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[16 May 2010 09:47 AM]



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