मैं कलम कुछ क्रांति की बात लिखना चाहती हूँ...

दिल की कलम से... प्रेम मे डूबे हुए मैं गीत अब न लिख सकूँगी...मैं मिलन की चाशनी मे शब्द लिपटे न चखूँगी...हो भले चिर यौवना सौंदर्य की प्रतिमा भले हो...मैं समेटे कोख मे शृंगारिता अब न रखूँगी...मैं नहीं स्याही तुम्हारा रक्त बिंदु मांगती हूँ...मैं कलम कुछ क्रांति की बात लिखना... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
views
39
upvote
7
downvote
0
rating
7
comments
25
[16 May 2010 09:47 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix