“मखमली लिबास” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
मखमली लिबास आज तार-तार हो गया! मनुजता को दनुजता से आज प्यार हो गया!! सभ्यताएँ मर गईं हैं, आदमी के देश में, क्रूरताएँ बढ़ गईं हैं, आदमी के वेश में, मौत की फसल उगी हैं, जीना भार हो गया! मनुजता को दनुजता से आज प्यार हो गया!! भोले पंछियों के पंख,...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
गीत
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[16 May 2010 09:03 AM]



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