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कुछ ईधर की, कुछ उधर की ये ठीक है कि यहाँ ब्लागजगत में आज बहुत से ब्लागर इस प्रकार की शैली को अपना रहे हैं, जो आपस में विद्वेष और कटुता बढा रही है और लोगों को अच्छाई की अपेक्षा बुराई की ओर ले जा रही है। लेकिन इसमें भी मैं दोष पढने वाले व्यक्ति का ही अधिक मानता हूँ। क्यों कि आज... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[16 May 2010 08:53 AM]

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