आज का दिन है खास दिन जैसे......
हो गये रिश्ते आलपिन जैसे.दिलो-दिमाग़ डस्टबिन जैसे.मन में अंबार कामनाऒं का,अब तो जीना हुआ कठिन जैसे.होड़ जोखिम की और पैसे की,लोग हैं बोतलों के जिन्न जैसे.आज उनका दीदार जम के हुआ,आज का दिन है खास दिन जैसे.साल दर साल उम्र खो बैठे,लम्हा-लम्हा या दिनबदिन...
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योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
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[16 May 2010 08:28 AM]



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