हताशा
तुम न आये मैं तुम्हारी बाट ही तकती रही,और स्वागत को तुम्हारे साज नव सजती रही ! तुम न आये सूर्य की अंतिम किरण भी खो गयी है,तुम न आये चन्द्र की यह ज्योत्सना भी सो गयी है !तुम न आये पर निशा ने कालिमा जग पर बिछा दी,तुम न आये फिर उषा ने अरुणिमा भू पर लुटा दी...
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Sadhana Vaid
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[16 May 2010 07:52 AM]



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