छिटपुट !
आज के इस अवसादपूर्ण वातावरण मे इन्सान की रोजमर्रा की जिन्दगी एक मशीन बन कर रह गई है। और जिसकी रोज की दिनचर्या मे ज्यादातर लम्हे इन्सान को ढेर सारी उलझनों मे ही उलझाकर तनावग्रस्त बनाये रखते है। मगर साथ ही कभी-कभी इन्सान के जीवन मे उन कुछ खुशहाल पलों का भी...
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पी.सी.गोदियाल
tirchinazar
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[16 May 2010 07:23 AM]



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