वानर से नर और लुटेरी अर्थव्यवस्था से पशुपालन तक

अनवरत पेड़ों पर चढ़ने वाले एक वानर-दल से मानव-समाज के उदित होने से निश्चय ही लाखों वर्ष - जिन का पृथ्वी के इतिहास में मनुष्य-जीवन के एक क्षण से अधिक महत्व नहीं है, गुजर गए होंगे। परन्तु उस का उदय हो कर रहा। और यहाँ फिर वानर-दल एवं मानव-समाज मं हम क्या विशेष... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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[16 May 2010 07:24 AM]

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