सीहोर का मुशायरा, हठीला जी के घर काव्य-गोष्ठी और वो टैक्सी वाला

कुछ शब्द श्री विद्या के उपासकों के बीच प्रचलित है- यत्रास्ति भोगो न च तत्र मोक्षः यत्रास्ति मोक्षो न च तत्र भोगः। श्रीसुंदरी सेवनतत्पराणां भोगश्च मोक्षश्च करस्थ एव॥ जहां भोग है, वहां मोक्ष नहीं और जहां मोक्ष है वहां भोग नहीं। लेकिन त्रिपुरसुंदरी के आराधक को भोग... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत पाण्डेय
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
8
[16 May 2010 07:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix